
शिमला। जिला पुलिस अब नए अंदाज में काम करेगी। पुलिस को दो भागों में बांटकर आपराधिक मामलों को निपटाने और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने की योजना बनाई गई है। थानों में एक विंग केवल इनवेस्टिगेशन के मामलों को देखगा और दूसरा विंग कानून व्यवस्था संभालेगा।
वर्तमान में जरूरत के मुताबिक कर्मचारियों से लॉ एंड आर्डर और इनवेस्टिगेशन दोनों काम लिए जा रहे हैं। जिसके पास कोई जांच है, गश्त और वीवीआईपी ड्यूटी है, उस स्थिति में जांच लंबी खिंचना स्वाभाविक है। यही सबसे बड़ा कारण है कि पुलिस तय समय में अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाती। इस खामी को दूर करने के मकसद से प्रदेश पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी थानों में अलग अलग विंग बनाने की सलाह दी गई है। इस व्यवस्था के लागू होने से और कार्य तय होने पर पुलिस एक दूसरे के कार्य क्षेत्र में हाथ नहीं डालेगी। यानी जो लॉ एंड आर्डर ड्यूटी करेगा, वह इनवेस्टिगेशन नहीं करेगा। ऐसे में अगर वीवीआईपी ड्यूटी देनी पड़े तो स्टाफ की कमी के कारण इनवेस्टिगेशन विंग में तैनात कर्मचारियों की ड्यूटी वीवीआईपी सुरक्षा में लगाना महकमे की मजबूरी रहेगी।
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दूर करेंगे कर्मचारियों की किल्लत
पुलिस अधीक्षक अभिषेक दुल्लर ने कहा कि इस व्यवस्था को शुरू करने की योजना है लेकिन थाने में स्टाफ की कमी इसके आड़े आएगी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की किल्लत को दूर करने के लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं।
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पुलिस कर्मचारियों के 200 पद खाली
जिला शिमला में पंद्रह थाने हैं। मौजूदा समय में करीब दो सौ पुलिस कर्मचारियों के पद खाली हैं। इस कमी को दूर करने के लिए होमगार्ड के जवानों की मदद ली जा रही है। थानों में स्टाफ की भारी कमी इस योजना को लागू कर पाने में सबसे बड़ा रोड़ा है। व्यवस्था चालू करना चुनौती सक कम नहीं।
